देहरादून: मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य गंगा समिति की बैठक संपन्न हुई। सीएस ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा समितियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी के दृष्टिगत लोकल कम्युनिटी ग्रुप्स में ऐसे लोगों को जोड़ा जाए जो इस काम में दिल से रूचि लेते हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि जिला गंगा समितियों की बैठकें निर्धारित समयसीमा में अवश्य करा ली जाएं, सोशल ऑडिट और थर्ड पार्टी से योजनाओं का मूल्यांकन के लिए मैकेनिज्म तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में गंगा के किनारे बसे क्षेत्रों में प्राकृतिक और जैविक खेती पर अधिक से अधिक फोकस किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेषकर मैदानी क्षेत्रों में योजनाओं को इस प्रकार से डिजाइन किया जाए कि STP से उपचारित जल को खेती के लिए पुनः प्रयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत आजीविका सृजन कार्यक्रम को ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित “हाउस ऑफ हिमालयाज” से जोड़ा जाए।मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं को साझा करने के साथ ही सुझाव भी मांगे। कहा कि किसी भी योजना में फंडिंग की समस्या आ रही है तो मिसिंग लिंक में प्रस्ताव भेजे जाएं व योजनाओं की प्रत्येक स्तर की टाइमलाइन निर्धारित की जाए। बैठक में परियोजना निदेशक नमामि गंगे रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि नमामि गंगे के तहत् प्रदेश में निर्मल गंगा, अविरल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा और अर्थ गंगा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
इस दौरान पर वन विभाग से प्रोजेक्ट निदेशक नमामि गंगे मनोज चंद्रन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी मौजूद रहे।
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