उत्तराखण्ड

सीएम धामी ने किया ‘‘द लीजेण्ड ऑफ कोश्यारी भगत दा‘‘ पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते दिन को मुख्यमंत्री आवास कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित पुस्तक द लीजेण्ड ऑफ कोश्यारी भगत दा का विमोचन किया। उन्होंने पुस्तक के लेखक एवं प्रकाशकों को भगत सिंह कोश्यारी के जन्म दिन के अवसर पर पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित करने के लिये आभार भी व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने भगत सिंह कोश्यारी को जन्म दिवस की शुभकामनाये देते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व का हर पहलू प्रेरणादायी है। वे सहजता की प्रतिमूर्ति है वे व्यक्ति के साथ मिशन है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी वास्तव में भारतीय राजनीति के पुरोधा, जन नेता, कुशल प्रशासक एवं विचारक है। वे राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं गौरव के भी प्रतीक है। अपने जीवन की शुरूआत में ही उन्होंने एक राजनेता के साथ ही कुशल शिक्षक के रूप में समाज को दिशा देने का कार्य किया। ऐसे विद्धान एवं सरल स्वभाव के व्यक्तित्व का देश के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उपस्थिति हम सबको गौरवान्वित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भगत सिंह कोश्यारी के सानिध्य में रहकर सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। कोश्यारी ने सामान्य परिवेश में रहकर शिखर छूने का कार्य किया है तथा अपने पुरूषार्थ से महानता प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में 30 वर्षों से लम्बित टिहरी डैम को उसके पूर्ण स्वरूप में लाने का श्रेय भी कोश्यारी को है। प्रदेश में ऊर्जा मंत्री रहते उन्होंने इसके लिये राजनैतिक नफा नुकसान की चिंता न करते हुए बांध बनाने में अपना योगदान दिया। कोश्यारी सभी नीतिगत विषयों के जानकार, दृढ़ निश्चय वाले व्यक्ति् रहे हैं। उन्होंने सीख दी कि पूरे प्रदेश को समझने, जन समस्याओं की जानने का प्रयास करो, वक्त आने पर व्यक्ति के अच्छे कार्यों को पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबको साथ लेकर चलना, छोटे-बड़े का भेदभाव न कर सभी को आगे बढ़ाने में मदद करने की भी सीख हमें कोश्यारी से मिली है। उनका जीवन हम सबके लिये निश्चित रूप में अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी है।

इस अवसर पर राज्य सभा सांसद नरेश बंसल ने पुस्तक को प्रेरणादायी बताते हुए कोश्यारी को बड़े दिल वाला जन नेता बताया। वे चौपाल में रहें या राजभवन में उनकी दिनचर्या साधारण ही रहती है। उन्होंने कहा कि उन्हें भी कोश्यारी की छत्र छाया में आगे बढ़ने का मौका मिला है। पुस्तक के लेखक बी0एस0जोगदण्डे तथा संकल्पना सहयोगी रविमोहन अग्रवाल ने पुस्तक के विषय वस्तु की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन देवेन्द्र भसीन द्वारा किया गया।

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