हिमाचल प्रदेश

बाढ़ से हाहाकार, अब भूख से बिलख रहे लोग; बाधित सड़क बनी आफत

मंडी में बादल फटने से तबाही, चौथे दिन भी हालात नहीं सुधरे; राशन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने के बाद उत्पन्न आपदा की स्थिति चौथे दिन भी जस की तस बनी हुई है। सराज और थुनाग क्षेत्रों में अब भी सड़क संपर्क और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी दिक्कतें आ रही हैं।

राशन संकट गहराने की आशंका

सड़क संपर्क टूटने के कारण सराज क्षेत्र में अब तक राशन नहीं पहुंच पाया है। हालांकि बगस्याड़ और अन्य राहत शिविरों तक वायु और सीमित सड़क मार्गों से करीब 500 राशन किट पहुंचाई जा चुकी हैं, लेकिन थुनाग क्षेत्र में पुलों और सड़कों को हुए व्यापक नुकसान के कारण राहत सामग्री पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। यदि आने वाले दिनों में सराज क्षेत्र में राशन आपूर्ति सुचारू नहीं हो पाई, तो वहां खाद्य संकट गहरा सकता है। गुरुवार को भी थुनाग के लोग राशन का इंतजार करते रहे, लेकिन खराब मौसम के चलते उन्हें निराश लौटना पड़ा।

स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित

सराज के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह चरमरा गई हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने से मरीजों को पीठ या पालकी के सहारे अस्पतालों तक ले जाना पड़ रहा है।

फंसे छात्र सुरक्षित निकाले गए

आपदा प्रभावित थुनाग क्षेत्र से औद्यानिकी एवं वानिकी कॉलेज के 92 छात्रों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया है। भारी बारिश और परिवहन साधनों के अभाव में छात्र और उनके शिक्षक कई दिनों से फंसे हुए थे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। गोहर क्षेत्र के सभी स्कूलों को एहतियातन बंद कर दिया गया है।

148 सड़कें, 353 बिजली लाइनें और 605 पेयजल योजनाएं ठप

मंडी में एक राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कुल 148 सड़कें अब भी बंद हैं। 353 बिजली आपूर्ति लाइनों के ठप होने से सैकड़ों गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। वहीं, 605 पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने से पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है।

स्यांज में ड्रोन से खोज अभियान शुरू

मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि गोहर उपमंडल के स्यांज क्षेत्र में ड्रोन की मदद से खोज अभियान चलाया जाएगा। यहां बादल फटने के बाद आई बाढ़ में दो घर बह गए थे। अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि सात अन्य अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए अब प्रभावित क्षेत्र का ड्रोन सर्वे किया जाएगा।

अब तक 198 लोगों का सफल रेस्क्यू

प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों से अब तक 198 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। थुनाग क्षेत्र में आवश्यक सरकारी भवनों की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, जिससे राहत कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

Uttarakhand Jagran

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