देहरादून; मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ताजपोशी के बाद सबसे पहला सवाल हर किसी के ज़हन में यही था की मुख्यमंत्री आखिर उपचुनाव कहा से लड़ेंगे. चुनाव लड़ने के पीछे की मुख्य वजा रही , मुख्यमंत्री धामी अपनी ही विधानसभा सीट खटीमा से भरी मतों से चुनाव हार गए थे । अब धामी को छह माह के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना है। धामी के फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहले चम्पावत से पार्टी विधायक कैलाश गहतौड़ी ने उनके लिए सीट छोड़ने का दावा किया था । जिसके बाद आधा दर्जन से अधिक विधायक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी सीट छोड़ने का दावा ठोक चुके थे तो वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस से धारचूला विधायक हरीश धामी ने भी मुख्यमंत्री के लिए अपनी सीट छोड़ने की बात कही थी
यही नहीं मुख्यमंत्री के लिए खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार भी अपनी सीट छोड़ने की बात कर चुके थे लेकिन , चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी के इस्तीफा देने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी अब इसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा जहां अपने मुख्यमंत्री को उपचुनाव में जीत दिलाने की पूरी कोशिश करेगी तो वही विपक्षी कांग्रेस भी भाजपा के विजयी रथ को रोकने की कोई कमी कोशिश नहीं छोड़ेगी। भाजपा-कांग्रेस के बीच एक बार फिर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।
चंपावत बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जा सकता है. विधानसभा चुनाव 2022 में चंपावत में 50.26 फीसदी वोट पड़े थे. जिसमें बीजेपी के कैलाश गहतोड़ी ने कांग्रेस के हेमेश खार्कवाल को 5304 वोटों से हराया था. चंपावत सीट खटीमा विधानसभा सीट से सटी हुई है. जिसका 40 फीसदी हिस्सा पर्वतीय क्षेत्र में आता है और 60 फीसदी मैदानी क्षेत्र है . मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपचुनाव लड़ने के लिए चंपावत विधानसभा सीट सबसे मुफीद बताई जा रही है। इसके पीछे यह वजह बताई जा रही है कि इस विधानसभा क्षेत्र की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सीएम धामी के मूल विधानसभा क्षेत्र खटीमा के करीब के इलाके में बसी है। खटीमा की सीमा से लगे बनबसा और टनकपुर में करीब 50 हजार मतदाता रहते हैं, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में चंपावत विधानसभा में 95648 वोटर पंजीकृत है तराई और पहाड़ से मिली इस विधानसभा सीट में आधे से अधिक मतदाता (48657) टनकपुर-चंपावत क्षेत्र से हैं,जबकि पहाड़ी हिस्से में करीब 47 हजार मतदाता पंजीकृत हैं। विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल रहने वाले सीएम धामी टनकपुर-बनबसा के मतदाताओं के संपर्क में भी रहे हैं।
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