उत्तराखण्ड

आपदा के बीच गरमा गया सियासी माहौल: मंत्री गणेश जोशी ने डीएम को सरेआम दी चेतावनी

राजधानी में आई भयावह आपदा के बीच कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और जिलाधिकारी सविन बंसल के बीच के वार्तालाप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सरेराह मंत्री जोशी डीएम बंसल को चेताने वाले अंदाज में बोल रहे हैं कि रंग-ढंग ठीक कर लें अपना। डीएम जवाब दिए बिना हाथ जोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। वायरल वीडियो के मुताबिक, इधर से मंत्री जोशी आपदाग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करने जा रहे हैं। सामने से डीएम सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह अपनी टीम के साथ आ रहे हैं। दोनों आमने-सामने आकर रुक जाते हैं। मंत्री जोशी डीएम के सामने अपनी नाराजगी जताते हैं। कहते हैं कि तुमने फोन क्यों नहीं उठाया। वह डीएम बंसल को कहते हैं, रंग-ढंग ठीक कर लें अपना। एसएसपी सिंह बीच-बचाव की कोशिश करते हैं तो मंत्री जोशी कहते हैं मुख्य सचिव ने फोन उठा लिया। सचिव मुख्यमंत्री व गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने फोन उठाया।

एसडीएम ने भी उठा लिया। साहब को जब आज सुबह मुख्यमंत्री के यहां से फोन किया तब जाकर फोन उठ रहा है। इतना सुनते ही डीएम सविन बंसल मंत्री के सामने हाथ जोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। घटना पर मंत्री जोशी का कहना है कि हमें जिस उम्मीद से जनता ने बिठाया है, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना हमारी जिम्मेदारी है। भाजपा का मुख्यमंत्री हो, मंत्री, विधायक हो या कार्यकर्ता, हम पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा की जिम्मेदारी निभाते हैं।

सत्ताधारी भाजपा इस पूरे प्रकरण में अपने मंत्री के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि अधिकारी हों या जनप्रतिनिधि, सबका काम जनता की सेवा है। जनता से चुना जो प्रतिनिधि होता है, उसके पास बड़ी जिम्मेदारी होती है। जनता के प्रति वह जवाबदेह होता है। इसलिए किसी भी अधिकारी को जनप्रतिनिधि की बात का सम्मान करना चाहिए। हर हाल में करना चाहिए। किसी प्रकार की जनसमस्या के लिए अगर जनप्रतिनिधि बोलता है तो निश्चित तौर से ऐसे अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए। अधिकारी हों या जनप्रतिनिधि दोनों जनसेवक हैं। उनकी जिम्मेदारी गरिमा के अनुरूप हो, इसका सबको पालन करना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि वीडियो देखकर साफ है कि मंत्री गणेश जोशी का बातचीत करने का रवैया गलत है। एक जनप्रतिनिधि को मर्यादा में रहकर अपनी बात कहनी चाहिए। अगर सरकार के मंत्री ये बात कह रहे हैं कि अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं तो इससे साबित होता है कि प्रदेश में सरकार किस तरीके से चल रही है। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी भाजपा के कई नेता, विधायक, मंत्री अधिकारियों के फोन न उठाने पर नाराजगी जगजाहिर करते रहे हैं।

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