उत्तराखण्ड

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का हुआ निधन

द्वारिका एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का हरिद्वार से काफी लगाव था। कनखल स्थित ज्ञानलोक कॉलोनी में उनका शंकराचार्य मठ है। अक्सर वह मठ में आते थे। 97 वर्ष की उम्र में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती पिछले साल हुए कुंभ में तीन अप्रैल 2021 को हरिद्वार आए और नीलधारा में गंगा आरती की। उनके निधन से संतों में शोक की लहर है। संतों ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि दी। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने 99 वर्ष की उम्र में रविवार को नरसिंहपुर के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में अंतिम सांस ली। हरियाली तीज के दिन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का 99वां जन्मदिन मनाया गया। उनके निधन से संत समाज में शोक की लहर है।

 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती संत समाज के प्रेरणास्रोत और त्याग और तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। उनके निधन से सनातन धर्म को अपूरणीय क्षति हुई है।  निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी व आनंद पीठाघीश्वर स्वामी बालकानंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म व संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी रूपरूपानंद सरस्वती ने अतुलनीय योगदान दिया। उनके विचार और शिक्षाएं सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेंगी कालिका पीठाधीश्वर श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत, निर्मल अखाड़े के श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती धर्म संस्कृति के प्रखर विद्वान थे। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि वयोवृद्ध अवस्था में भी समाज का मार्गदर्शन करने वाले ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती युगपुरुष थे।

 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्रपुरी ने जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने पर शोक जताया है। कहा कि भगवान के बाद सनातन धर्म में जगद्गुरु शंकराचार्य जी को ही भगवान का दर्जा दिया जाता है। उनके ब्रह्मलीन होने से सनातन धर्म और संस्कृति की बड़ी अपूरणीय क्षति हुई है। श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने जीवन पर्यंत सनातन धर्म की ध्वजा को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना समूचा जीवन लगाकर सनातन धर्म के का संरक्षण संवर्धन किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरि गिरि ने कहा कि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने हमेशा हिंदू धर्म के प्रति श्रद्धालु भक्तों को जागरूक करते हुए सनातन परंपरा को बढ़ाते हुए बड़े बड़े धार्मिक आयोजन आयोजित किए।

स्वामी स्वरूपानंद के ब्रह्मलीन होने पर राज्यपाल और सीएम ने जताया शोक

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने संत समाज और उनके अनुयायियों के लिए इसे अपूर्णीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा की स्वामी स्वरूपानंद ने धर्म, आध्यात्म व परमार्थ के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, जिसे सदैव याद किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद का गोलोक धाम जाना संत समाज के साथ ही पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।

शंकराचार्य स्वरूपानंद के सामाजिक और आध्यात्मिक कार्य हमेशा रहेंगे याद

ज्योतिष्पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने से जोशीमठ में शोक की लहर है। क्षेत्र के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस पर शोक जताया। जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ में जहां शोक की लहर है वहीं शंकराचार्य मठ और साधु संतों ने शोक व्यक्त किया। कहा गया कि शंकराचार्य स्वरूपानंद के सामाजिक और आध्यात्मिक कार्य हमेशा याद रखे जाएंगे।

 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी ने शंकराचार्य के ब्रह्मलीन होने पर इसे सनातन धर्म के लिए बड़ी क्षति बताया। कहा कि उनकी ओर से किए गए धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों को समाज सदैव याद रखेगा। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के प्रवक्ता डा. बृजेश सती, ब्रह्मचारी मुकुंदानंद, विष्णुप्रिय नंद, महिमा नंद उनियाल, जगदीश उनियाल, मनोज भट्ट, वैभव सकलानी, कृष्ण मणि थपलियाल आदि ने शोक व्यक्त किया है।

वहीं रुद्रप्रयाग में भी सनातन धर्म के अनुयायियों ने शोक जताया। शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य व केदारनाथ-बदरीनाथ मंदिर मंदिर समिति के सदस्य श्रीनिवास पोस्ती ने कहा कि एक युग का अंत हो गया है। बताया कि वर्ष इलाहाबाद कुंभ में त्रिवेणी संगम पर शंकराचार्य जी से दीक्षा प्राप्त की थी। बताया कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य समाधिस्थल का निर्माण कर वहां शिवलिंग स्थापित किया था। दूसरी तरफ बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी-गंगाधर लिंग, बागेश लिंग, शिव लिंग, आचार्य विश्वमोहन जमलोकी, संस्कृत अकादमी के पूर्व निदेशक डा. सुरेशानंद बहुगुणा, संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. भानु प्रकाश देवली ने जगतगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर दुख प्रकट किया।

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