सपा ने उत्तर प्रदेश में छोटे दलों और सामाजिक संगठनों को साथ लाने की विशेष रणनीति तैयार की है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इन दलों व संगठनों के साथ मजबूत संबंध बनाने का फैसला किया है। हालांकि, उसके पहले होने वाले पंचायत चुनाव में इन संगठनों के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
सपा सूत्रों के मुताबिक, ये ऐसे दल हैं, जिनका प्रदेश स्तर पर तो कोई दखल नहीं है, लेकिन किसी जिला या तहसील स्तर पर खासा प्रभाव है। गाजियाबाद के अपनी जिंदगी-अपना दल और कानपुर की राष्ट्र उदय पार्टी के नेता लगातार सपा के संपर्क में हैं।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय भारतीय मानव समाज पार्टी, पिछड़ा दलित विकास महासंघ, गांधीयन पीपुल्स पार्टी, राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी, अति पिछड़ा समाज महासभा, राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी, कंज्युमर प्रोटेक्शन एंड राईट काउंसिल आदि संगठनों के प्रतिनिधि पिछले दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात भी कर चुके हैं। सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इसका फायदा उन्हें आने वाले चुनाव में जरूर मिलेगा।
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