देश-विदेश

एलिजाबेथ की महारानी बनने की अद्भुत और रोमांचक कहानी

70 वर्ष के रिकॉर्ड समय तक इंग्लैंड और कई कॉमनवेल्थ देशों की महारानी रहीं, एलिजाबेथ द्वितीय का नैनीताल कनेक्शन भी रहा है। एलिजाबेथ के मात्र 26 वर्ष की आयु में विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली रानी बनने की कहानी बहुत अद्भुत और रोमांचक है।

जंगल सफारी पर निकली एलिजाबेथ ने रात पेड़ पर गुजारी थी, जब सुबह वहां से उतरीं तो पिता के निधन की वजह से वह महारानी थीं। ऐतिहासिक तथ्य है कि एलिजाबेथ द्वितीय के महारानी बनने की रात नैनीताल के बेटे जिम कॉर्बेट उनके साथ थे और महारानी बनने के बाद सबसे पहले कॉर्बेट ने ही उन्हें देखा था।

70 साल पहले पांच फरवरी,1952 को राजकुमारी एलिजाबेथ अपने पति प्रिंस फिलिप के साथ केन्या के जंगल की यात्रा पर थीं। इस दौरान प्रसिद्ध शिकारी प्रकृतिवादी जिम कॉर्बेट भी उनके साथ थे और राजकुमारी ने उन्हें भी अपने साथ ट्री टॉप पर रहने के लिए आमंत्रित किया। जिम ने एक गाइड के रूप में जंगल में प्रिंसेस और रॉयल पार्टी के साथ दिन बिताया था।

रात में जब राजकुमारी सो गईं तब कॉर्बेट ने पेड़ पर लगाई गई 30 फिट की सीढ़ी के कोने में बैठकर राजकुमारी की रक्षा के लिए सारी रात जागकर बिताई। कॉर्बेट ने इस पूरी घटना का वर्णन अपनी पुस्तक ‘ट्री टॉप’ में विस्तार से किया है। कॉर्बेट ने लिखा है कि उस रात जो हुआ उससे अनजान राजकुमारी ने अगली सुबह फिर से जानवरों का फिल्मांकन शुरू कर दिया

बाद में शाही लॉज में लौट आईं, जहां उन्हें बताया गया कि इंग्लैंड के सम्राट और राजकुमारी के पिता किंग जॉर्ज षष्ठम का निधन हो गया। हालांकि, एलिजाबेथ का राज्याभिषेक दो जून 1953 को किया गया, लेकिन सम्राट की दो पुत्रियों में बड़ी होने के नाते पहले से तय था कि किंग जॉर्ज की मृत्यु के बाद वे ही महारानी बनेंगी और छह फरवरी को ही वे महारानी बन गईं थीं।

उल्लेखनीय है कि किंग जॉर्ज 1947 में भारत की स्वतंत्रता के दौरान भारत के अंतिम सम्राट भी रहे। जिस लॉज में एलिजाबेथ ने अगली रात गुजारी उसकी विजिटर बुक में कॉर्बेट ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए लिखा ‘दुनिया के इतिहास में पहली बार, एक युवा लड़की एक शाम राजकुमारी के रूप में पेड़ पर चढ़ी और अपने सबसे रोमांचक अनुभव के बाद वह अगले दिन एक रानी के रूप में नीचे उतरीं। ईश्वर उसे आशीर्वाद दे’।

वर्ष 1955 में लिखित ट्री टॉप कॉर्बेट की अंतिम पुस्तक थी जिसे ऑक्सफोर्ड इंडिया ने प्रकाशित किया था। इसकी प्रस्तावना लार्ड हेली ने लिखी और इसमें चित्रण रेमंड शेफर्ड ने किया था। जिम कॉर्बेट का जन्म नैनीताल में 1875 में हुआ था। क्रिस्टोफर विलियम और मेरी जेन कॉर्बेट की आठवीं संतान थे। उनके पिता मल्लीताल में पोस्टमास्टर थे। लगभग 72 वर्ष मुख्यत: नैनीताल और उत्तराखंड में व्यतीत करने के बाद 1947 में वे केन्या चले गए थे, जहां 1955 में उनका निधन हो गया।

Uttarakhand Jagran

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