माणा हिमस्खलन से रेस्क्यू कर अस्पला लाए गए 36 श्रमिकों को मंगलवार को सेना के अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। ये सभी श्रमिक अपने घर चले गए हैं। 28 फरवरी की सुबह माणा के पास हुए हिमस्खलन में बीआरओ की कार्यदायी संस्था के 54 श्रमिक चपेट में आ गए थे। सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीम ने तीन दिनों तक रेस्क्यू अभियान चलाकर 46 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जबकि आठ की बर्फ में दबने से मौत हो गई थी। सभी 46 घायलों को हेलिकॉप्टर से सेना के ज्योतिर्मठ स्थित अस्पताल में भर्ती किया गया। गंभीर घायल दो श्रमिकों को एम्स ऋषिकेश भेजा गया जबकि 44 श्रमिक सेना के अस्पताल में ही भर्ती थे।
एक श्रमिक को अस्पताल से सोमवार को छुट्टी दे दी गई थी, वहीं मंगलवार को 36 अन्य श्रमिकों को भी छुट्टी दे दी गई। अब सात श्रमिक ही अस्पताल में भर्ती हैं। सेना अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार मिश्रा ने बताया कि इन श्रमिकों को मामूली चोटें आई थीं जिनका स्वास्थ्य सामान्य होने लगा है। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। वहीं अस्पताल से डिस्चार्ज किए श्रमिकों का तहसील प्रशासन की ओर से भी पूरा विवरण एकत्रित किया गया। उनके नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित सभी जानकारियां एकत्रित की गईं। मौसम विभाग की चेतावनी के चलते प्रशासन ने औली में पर्यटकों की आवाजाही बंद कर दी थी। दो दिन औली में पर्यटकों की आवाजाही बंद रहने के बाद मंगलवार को यहां आवाजाही शुरू कर दी गई। मंगलवार को फिर औली पर्यटकों से गुलजार हो गया।
माणा में हिमस्खलन की घटना के बाद मौसम विभगा की चेतावनी के चलते प्रशासन ने एहतियातन औली सहित अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही रोक दी थी। रविवार और सोमवार को औली में पर्यटक नहीं पहुंच पाए, जिससे औली की वादियों में सन्नाटा पसरा रहा। मंगलवार सुबह बारिश हुई, लेकिन बाद में मौसम सामान्य होने पर पर्यटकों को औली जाने की अनुमति दे दी गई। वहीं औली में 105 पर्यटकों ने गढ़वाल मंडल विकास निगम की चेयर लिफ्ट का लुत्फ उठाया।



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