साइबर ठगों ने मुंबई से ईडी और आयकर अधिकारी बनकर 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधान कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एचसी नितांत को सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 23 लाख रुपये की ठगी की। आरोपी उन्हें बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह से खाते में 30 करोड़ रुपये की रकम लेने का आरोप लगाते हुए जेल भेजने की धमकी देकर डराते रहे। पूर्व वैज्ञानिक से आरोपी रोज एक-एक घंटे काॅल कर उन्हें धमकाते थे। बाद में एफडी तुड़वाकर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया है।ट्रांस यमुना स्थित श्रीनगर काॅलोनी निवासी डाॅ. एचसी नितांत भारतीय कृषि अनुसंधान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक हैं। वह 18 साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। 10 सितंबर को सुबह 9 बजे उनके व्हाट्सएप पर काॅल आई। काॅल करने वाले ने कहा कि मैं अजय पाटिल बोल रहा हूं। प्रवर्तन निदेशालय में अधिकारी हूं। कहा कि आपके नाम से खाता मुंबई की एक बैंक की शाखा में है। खाते में 30 करोड़ से अधिक का अवैध लेनदेन हुआ है। इसमें बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह ने रकम भेजी है। यह रकम आरोपी सदाकत खां के माध्यम से आई है। खाते में 30 लाख रुपये बचे हैं। बाकी रकम निकाल ली गई है।
एफआईआर में आरोपी के साथ तुम्हारा (डाॅ. एचसी नितांत) भी नाम लिखा गया है। इसका नोटिस भी भेजा जा रहा है। यह भी कहा कि अगर आप सही हैं तो बच जाएंगे। धमकी से डाॅ. एचसी नितांत घबरा गए। कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया है। गलतफहमी हो गई है। फिर से खाता चेक कर लिया जाए मगर आरोपी उन्हें धमकाते रहे। एक घंटे तक बात करने के बाद काॅल काट दी। 11 सितंबर को फिर से फोन आया। इस बार दया नामक व्यक्ति ने बात की। उसने खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताया। कहा कि तुम्हारे घर पर किसी भी समय ईडी और आयकर का छापा पड़ सकता है। जांच में तुम्हारे खाते में अवैध रकम आने की बात सामने आई है।
डाॅ. एचसी नितांत ने बताया कि दोनों की बात सुनकर वो घबरा गए। आरोपी उनके खाते की जांच करने की बात कर रहे थे। विश्वास दिलाने के लिए उनका आधार कार्ड व्हाट्सएप पर भेजा। इससे उन्हें लगा कि सही लोग हैं। वह खाते में रकम की जानकारी भी दे रहे थे। बाद में उनसे खाते की अन्य जानकारी ले ली। उन्हें सात दिन तक सुबह नौ बजे कॉल किया जाता था। हर बार रोज एक-एक घंटे तक बात करते थे। इस दाैरान किसी और को बताने पर जेल भेजने की धमकी दी जाती थी। वह बदनामी के डर से किसी को कुछ नहीं बता पाए। आरोपी उन पर खाते का बैलेंस बताने का दबाव बनाने लगे। मगर उन्होंने खाते में रकम नहीं होने की बात कही।
डर की वजह से उन्होंने कहा कि उनकी 23 लाख की एफडी है। इस पर उन्होंने बैंक से एफडी की रकम निकालने के लिए कहा। 17 सितंबर को वो बैंक गए। एफडी की रकम खाते में ट्रांसफर करा ली। बाद में आरोपियों ने यह रकम आरटीजीएस के माध्यम से ले ली। रकम गंवाने के बाद डाॅ. नितांत ने 18 सितंबर को बेटे घटना की जानकारी दी। तब उन्होंने साइबर ठगी की आशंका जाहिर की। पुलिस से शिकायत करने पर केस दर्ज कर लिया गया। पुलिस जिन खातों में रकम गई है, उनकी जानकारी जुटा रही है।
डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में जगदीशपुरा क्षेत्र की रहने वाली एक शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट किया गया था। उनकी बेटी को जेल भेजने की धमकी दी गई थी। घबराने की वजह से शिक्षिका की जान चली गई थी। मामले में केस दर्ज हुआ। मगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। शाहगंज की युवती को भी ठगा गया था। 31 दिन तक स्काइप एप से जोड़कर हर गतिविधि पर नजर रखी थी। 16.20 लाख रुपये जमा करा लिए थे। मामले में केस दर्ज कराया था।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस या अन्य कोई एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। अगर कोई मुकदमा दर्ज होने या किसी के पकड़े जाने की जानकारी काॅल करके देता हैं तो समझ जाएं कि ठगी होने वाली है। ऐसे लोगों से काॅल पर बात न करें। किसी तरह की मदद चाहिए तो पुलिस के पास जाएं। 112 और 1090 पर काॅल करके अपनी शिकायत दर्ज करा दें। किसी तरह की रकम नहीं देनी चाहिए।

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