पहलगाम हमले के बाद भारत में रह रहे पाकिस्तानियों को उनके देश वापस भेजने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में राजोरी के शाहदरा शरीफ में 43 वर्षों से रह रहीं दो सगी बहनों को भी पाकिस्तान जाने का फरमान मिला है। इस फरमान के बाद दोनों बेचैन हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान में अब उनका कोई नहीं है। ऐसे में वह वहां कैसे रह पाएंगी?
दोनों बहनों सगीर जमील (65) और जमीर जमील (63) के परिजनों ने बताया कि 43 साल पहले कुछ ऐसे हालात बने थे कि उनके परिजन दोनों सगी बहनों को राजोरी के शाहदरा शरीफ ले आए थे। उसके बाद दोनों की परवरिश यहीं पर हुई, उनका विवाह भी यहीं पर हुआ और अब उनके अपने पोते भी है। उन्होंने बताया कि 43 सालों में उनके जो भी परिजन पाकिस्तान में थे, उनकी अब मृत्यु हो चुकी है और अब पाकिस्तान में उनका कोई नहीं रहता।
दोनों बहनों के परिजनों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि उन दहशतगर्दों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन उस हमले से ऐसे लोगो को न जोड़ा जाए, जिनका हमले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि दोनों बहनें अब उम्रदराज हो चुकी हैं और अक्सर बीमार भी रहती हैं और जब उनका पाकिस्तान में कोई है ही नहीं तो वो बुढ़ापे में वहां किस के पास जाएंगी? वहीं पुलिस ने सरकार के आदेश का पालन करते हुए दोनों बहनों को राजोरी से वाघा बॉर्डर के लिए रवाना कर दिया है। बुद्धल के औरंगजेब से निकाह करने वाली सारा खान भी पाकिस्तान जाएंगी, मगर इसके लिए उन्हें अपने 12 दिन के बेटे को भारत में ही पिता के पास छोड़ना पड़ेगा। औरंगजेब ने बताया कि उसका बड़ा बेटा उमर हयात पाकिस्तान में पैदा हुआ था। इसके बाद उनकी पत्नी को लॉन्ग टर्म वीजा मिला, जिसके बाद वह भारत आ गई।
बड़ा बेटा अब पांच साल का है और करीब 12 दिन सारा ने एक और बेटे को जन्म दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार के जो आदेश जारी हुए हैं, उस आदेश के अनुसार उनकी पत्नी पाकिस्तान में जन्मे अपने बड़े बेटे उमर को साथ लेकर पाकिस्तान जाएंगी, लेकिन बुद्धल में पैदा हुए 12 दिन के मासूम को मां का साथ छोड़ना होगा। औरंगजेब ने बताया कि वह वाघा बॉर्डर पर अधिकारियों से गुहार लगाएंगे कि 12 दिन के मासूम को भी या तो मां के साथ जाने दिया जाए या मां को ही यहीं रहने दिया जाए।

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