भारत पर रूस को सैन्य मदद का शक, यूरोपीय संघ ने सरकार से कंपनियों की जानकारी मांगी

यूरोपीय संघ (ईयू) ने भारत सरकार को जी-7 प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रूस को सैन्य उपयोग वाली वस्तुओं की आपूर्ति करने में शामिल भारतीय कंपनियों की जानकारी प्रदान की है। हालांकि, इस मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। बता दें कि भारत का कहना है कि नीतिगत तौर पर वह एकतरफा प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करता है और केवल संयुक्त राष्ट्र के लगाए गए प्रतिबंधों को ही मान्यता देता है।

सूत्रों के मुताबिक, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि डेविड ओ सुलिवन ने प्रतिबंध के बावजूद रूस को सैन्य उपयोग वाली वस्तुओं की सप्लाई के रोकथाम के लिए अक्तूबर महीने में भारत का दौरा भी किया था। इस बीच उन्होंने भारतीय अधिकारियों को रूस को उत्पाद आपूर्ति करने वाली भारतीय फर्मों के बारे में कुछ विवरण प्रदान किए हैं, जो जी-7 की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और मास्को पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि भारत ने इस मामले पर यूरोपीय संघ से और अधिक जानकारी मांगी है।

बता दें कि बीते दिनों अमेरिका ने रूस को संवेदनशील उपकरण प्रदान करने के चलते भारत की 19 निजी फर्मों पर प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि विदेश मंत्रालय (एमईए) ने उस समय कहा था कि इन कंपनियों में से किसी ने भी घरेलू कानूनों का उल्लंघन नहीं किया है। भारत के पास रणनीतिक व्यापार और अप्रसार नियंत्रण पर एक मजबूत कानूनी और नियामक ढांचा है। भारत तीन प्रमुख बहुपक्षीय अप्रसार निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं (वासेनार व्यवस्था, ऑस्ट्रेलिया समूह और मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था) का सदस्य है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत परमाणु अप्रसार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्ताव (1540) को प्रभावी ढंग से लागू कर रहा है।

 

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