गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में होने वाले आयोजनों से आय भी होगी

देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर की वीरानी अब जल्द ही दूर होगी। आने वाले दिनों में वहां विभिन्न विभागों के तत्वावधान में सेमिनार, कार्यशाला जैसे आयोजन होंगे। साथ ही राज्य से जुड़े तमाम विषयों पर भी मंथन किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण इस सिलसिले में सभी मंत्रियों को पत्र लिखने जा रही हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन को अनुसंधान केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए। इस कड़ी में वह सभी मंत्रियों को पत्र लिखने जा रही हैं कि वे समय समय पर अपने-अपने विभागों से संबंधित सेमिनार, कार्यशाला जैसे आयोजन गैरसैंण में करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करें। इससे गैरसैंण में सालभर कुछ न कुछ गतिविधियां होती रहेंगी।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि भराड़ीसैंण में आवासीय सुविधा भी उपलब्ध है। यदि आवश्यकता पड़ती है तो वहां होने वाले कार्यक्रमों के मद्देनजर कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध करा दी जाएगी। गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में होने वाले आयोजनों से आय भी होगी, जिसे वहां अनुरक्षण कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा।

गैरसैंण के भराड़ीसैंण में बना है विधानसभा भवन: गैरसैंण से 14 किलोमीटर दूर स्थित भराड़ीसैण में सरकार विधानसभा का एक बड़ा स्ट्रक्चर खड़ा कर चुकी है। यहां न केवल एक भव्य विधानसभा भवन निर्मित हुआ है, बल्कि सचिवालय, मंत्री, विधायक आवास समेत सीएम और विधानसभा अध्यक्ष के लिए भी आलीशान फ्लैट का निर्माण किया गया है। जाहिर है कि किसी राज्य के लिए ये किसी बहुमूल्य एसेट के रूप में है। लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं है, क्योंकि यहां करोड़ों खर्च कर इन भवनों का निर्माण तो किया गया है, लेकिन इनका उपयोग करने वाला कोई नहीं है।

भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन बनाने में खर्च हुए 168 करोड़ रुपए: 13वें वित्त आयोग में विधानसभा के लिए 88 करोड़ रुपये मंजूर हुए. विधानसभा भवन के निर्माण का जिम्मा भारत सरकार की निर्माण एजेंसी NBCC को दिया गया। कुल 105 करोड़ की लागत निर्माण के लिए तय हुई जो 168 करोड़ तक NBCC द्वारा बढ़ाई गयी। 100 एकड़ भूमि पर विधानसभा भवन, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष भवन, मुख्यमंत्री-मंत्री आवास, विधानसभा कार्यालय, विधायक छात्रावास, अधिकारी छात्रावास, एक हेलीपैड बनाया जाना प्रस्तावित था। कुल 20,812 वर्ग मीटर पर निर्माण कार्य होना तय हुआ था। 2014 में यहां पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और उसी साल पहली बार विधानसभा सत्र भी आहूत हुआ।

 

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