हरिद्वार:- हरिद्वार जेल में 15 बंदियों के एचआइवी संक्रमित होने का समाचार इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने से जेल प्रशासन की नींद उड़ गई। मामला बढ़ने पर जेल प्रशासन सामने आया और इसे भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया। साथ ही जेल में एचआइवी संक्रमित मरीजों की स्थिति सामने रखी। बताया गया कि वर्तमान में जेल में 23 एचआइवी संक्रमित बंदी हैं। जिनमें से कुछ पिछले एक से छह महीनों से जेल में निरुद्ध हैं, जबकि एक बंदी पिछले लगभग 10 वर्षों से कारागार में है। सभी का उपचार स्वास्थ्य विभाग की ओर से चल रहा है। जिला प्रशासन ने भी इसे खंडन करते हुए कहा कि हाल में जेल में दाखिल होने वाले सिर्फ दो मरीजों में एचआइवी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
सात अप्रैल को बंदियों और कैदियों के टीबी (क्षय रोग) की जांच के लिए जेल में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था। बुधवार को इंटरनेट मीडिया पर जिला कारागार हरिद्वार में 15 बंदियों में एचआइवी संक्रमण की पुष्टि होने का समाचार वायरल हो गया। इस पर हरिद्वार सहित शासन स्तर तक अफसरों की नींद उड़ गई। इसके बाद हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह ने बयान जारी कर इसे भ्रामक बताया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने इस मामले में प्रेस नोट जारी कर कहा कि जेल में आयोजित हेल्थ कैंप में क्षय रोग की जांच की गई थी, न कि एचआइवी की। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एचआइवी की जांच कारागार में समय-समय पर नियमित रूप से की जाती है। जेल में दाखिल होते ही निरुद्ध बंदियों की अन्य स्वास्थ्य जांच के साथ एचआइवी की जांच भी अनिवार्य रूप से होती है।
इसी प्रक्रिया के तहत अब तक कुल 23 बंदियों में एचआइवी संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से कुछ पिछले एक से छह महीनों से जेल में निरुद्ध हैं, जबकि एक बंदी पिछले लगभग 10 वर्षों से इस कारागार में है। जेल में दाखिल होते समय एचआइवी संक्रमण की पुष्टि होने और जमानत पर छूटने, बरी होने की स्थिति में इन संक्रमित मरीजों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। जेल में किसी तरह का संक्रमण नहीं फैल रहा है। जो संक्रमित है वह बाहर से भी संक्रमित होकर आया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया कि एचआइवी से पीड़ित सभी बंदियों का उपचार एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर के माध्यम से नियमित रूप से कराया जा रहा है।



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