चारधाम यात्रा की समीक्षा बैठक में मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

मंत्री सतपाल महाराज ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यात्रा मार्गों पर तीर्थयात्रियों को त्वरित प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय में शनिवार को पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चारधाम यात्रा की दृष्टि से जनपद के सभी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने के साथ साथ हिदायत दी कि सभी अधिकारी अपने फोन उठायें यदि किसी कारणवश नहीं उठा पाते हैं तो वापस संबंधित नम्बर पर कॉल करें। तीर्थयात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा हुई तो कार्यवाही की जायेगी।

मंत्री सतपाल महाराज- चार धाम यात्रा अपने चरम चरण में

पर्यटन मंत्री ने कहा कि चार धाम यात्रा अपने चरम चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में संबंधित विभाग के प्रत्येक अधिकारी को फोन उठाना चाहिए और यदि वह कॉल लेने की स्थिति में नहीं है, तो उसे वापस कॉल करना होगा। उन्होंने उन तीर्थयात्रियों के आगमन पर प्राथमिकता देने का सुझाव दिया, जिन्होंने पहले ही चारधाम के लिए होटल और अन्य बुकिंग कर ली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी असुविधा से बचने के लिए यात्रा मार्ग के बीच में रोकने के बजाए तीर्थयात्रियों को पहले ही पड़ाव पर रोका जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लोक निर्माण विभाग के सचिव से फोन पर वार्ता कर निर्देश दिए कि केदारनाथ यात्रा मार्गो पर पर्याप्त संख्या में जेई और अन्य अधिकारी तेनात किये जायें। उन्होने यात्रा मार्ग पर बने वैकल्पिक मार्ग और निर्माणाधीन पुलों का कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश देने के साथ ट्रेक रूटों की रेलिंगों को भी जल्द सही करने के निर्देश दिए।

मंत्री सतपाल महाराज ने कोविड का किया जिक्र

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि कोविड महामारी ने मनुष्य के फेफड़ों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। ऐसे में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्गों में ऑक्सीजन और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होने चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों से अनुरोध किया कि वह यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर से जाँच करवाने के अलावा उनकी सलाह अवश्य लें। पर्यटन मंत्री ने चार धाम मार्गों पर घोड़े व खच्चरों की मौत को भी गंभीरता से लिया। पशुपालन विभाग को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि घोड़े-खच्चरों को उचित आराम और चारा दिया जाए। साथ ही उन्होंने घोड़े-खच्चरों की मौत के लिए उनके मालिकों पर भी जवाबदेही तय करने के अधिकारियों को निर्देश दिए।

 

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